13/12/2016

7 Pay Commission सातवें वेतन की सौगात पर आज होगा फैसला : कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को हो सकते हैं कई और अहम निर्णय

राब्यू, लखनऊ : सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे प्रदेश के लाखों लोगों की निगाहें मंगलवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक पर लगी हैं। कैबिनेट बैठक में सरकार राज्य वेतन समिति की रिपोर्ट पर प्रदेश के 21 लाख राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों व पेंशनरों को सातवें वेतन का लाभ देने का फैसला कर सकती है। अगले वित्तीय वर्ष के शुरुआती चार महीनों में शासन के कामकाज के लिए जरूरी धनराशि का इंतजाम करने की खातिर 21 दिसंबर से शुरू होने वाले विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में लेखानुदान संबंधी विधेयक लाने के निर्णय पर भी मुहर लग सकती है। शासन की महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए संसाधनों का बंदोबस्त करने के लिए विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में चालू वित्तीय वर्ष के लिए दूसरा अनुपूरक बजट पेश करने का निर्णय भी सरकार कर सकती है। सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को प्रदेश के विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों पर लागू करने के बारे में रिटायर्ड आइएएस अधिकारी जी. पटनायक की अध्यक्षता में गठित राज्य वेतन समिति ने रिपोर्ट बुधवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सौंपी थी। समिति ने रिपोर्ट में कर्मचारियों के लिए प्रस्तावित सातवें वेतन के ढांचे को केंद्र सरकार के समतुल्य रखने रखने की सिफारिश की है। साथ ही, सातवां वेतन पहली जनवरी 2016 से लागू करने की संस्तुति भी की है। समिति ने कर्मचारियों के वेतन (वेतन बैंड और ग्रेड वेतन को जोड़कर) को 2.57 गुना करने की सिफारिश की है। राज्य कर्मचारियों के लिए शुरुआती न्यूनतम वेतन (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए) 18,000 रुपये और अधिकतम (मुख्य सचिव स्तर) 2,25,000 रुपये करने की संस्तुति की गई है। राज्य वेतन समिति की रिपोर्ट पर सरकार मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों, शिक्षकों और पेंशनरों को सातवें वेतन की सौगात देने का अहम फैसला कर सकती है। शेष पृष्ठ 10। 16कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को हो सकते हैं कई और अहम निर्णय 16अगले वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही को लेखानुदान लाने का है प्रस्ताव

लखनऊ : हाईकोर्ट की सख्ती के बाद उच्चशिक्षा राज्यमंत्री शारदा प्रताप शुक्ला को अपना अवैध निर्माण खुद ही गिरवाना पड़ा। लखनऊ में बंगला बाजार स्थित सात दुकानें जेसीबी लगाकर गिराई गईं। वैसे अभी भी कई दुकानें तथा एक दफ्तर बचा है। मंत्री का तर्क है कि यह निर्माण वैध है। सपा सरकार में विधायक रामपाल के बाद यह दूसरा अवैध निर्माण था, जिसको लखनऊ विकास प्राधिकरण को गिराना था। विस्तृत-7।


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