30/07/2017

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आदेश के सर्वाधिक महत्वपूर्ण बिन्दुओं का अनुवाद: 
17. As a result of above, in normal course the State would have been at liberty to proceed with the selection in terms of advertisement dated 7th December, 2012 in accordance with the amended rules by way of 15th amendment, in view of developments which have taken place during pendency of these appeals, 
उपरोक्त के परिणामस्वरूप, उन परिवर्तनों के दृष्टिकोण से जिन्होंने इन अपीलों के लंबित होने के दौरान जगह ली, सामान्य तौर पर राज्य को १५ वें संशोधन के संशोधित नियमों के अनुसार ०७.१२.१२ के विज्ञापन की शर्तों के अनुसार चयन को जारी रखने की स्वतंत्रता होगी,

(अर्थात इन अपीलों के लंबित होने के दौरान विज्ञापन से सम्बंधित कुछ मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जो कुछ आदेश दिए जा चुके हैं उन्हें ध्यान में रखते हुए सामान्य तौर पर राज्य को १५ वें संसोधन के संशोधित नियमों के अनुसार ०७.१२.१२ के विज्ञापन की शर्तों के अनुसार चयन को जारी रखने की स्वतंत्रता होगी). 
दिक्कत यहाँ आरम्भ होती है= 
the said advertisement cannot proceed and while upholding the said advertisement, relief has to be moulded in the light of developments that have taken place in the interregnum. 
उपरोक्त विज्ञापन आगे नहीं बढाया जा सकता (या जारी नहीं रखा जा सकता) जबकि इस विज्ञापन को कायम रखते हुए, अंतराल के (लंबित मामलों के) दौरान जो भी कुछ इस भर्ती से संबंधित आदेश पारित किये जा चुके हैं उनके अनुसार (विज्ञापन को) बनाने की छूट प्रदान की जाती है. 
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[in the light of developments that have taken place = जो भी विकास हुआ है उनके प्रकाश में = इस भर्ती से संबंधित जिन बिन्दुओं पर संशोधन के अंतिम आदेश दिए जा चुके हैं उनके अनुसार. 
(mould= परिवर्तित करके बनाना या किसी सांचे के अनुरूप बनाना)] 
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19. We have been informed that 66,655 teachers have already been appointed in pursuance of the interim orders of this Court. Having regard to the entirety of circumstances, we are not inclined to disturb the same. We make it clear that the State is at liberty to fill up the remaining vacancies in accordance with law after issuing a fresh advertisement.

हमें यह सूचित किया जा चुका है कि इस कोर्ट के अंतरिम आदेशों के अनुपालन में 66,655 शिक्षक पहले ही नियुक्त किये जा चुके हैं. समग्र परिस्थितियों के सम्बन्ध में, हम उन्हें डिस्टर्ब करने को तैयार नहीं हैं (या उन्हें डिस्टर्ब नहीं करना चाहते). हम यह स्पष्ट करते हैं कि राज्य नियमों के मुताबिक़ एक नया विज्ञापन जारी करने के बाद शेष रिक्तियों को भरने के लिए स्वतंत्र है।
20. The matters will stand disposed of in above terms.
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जिन अचयनित साथियों को यह अनुवाद और व्याख्या गलत लगती हो उनसे यही कहना है की यदि अनुवाद में कुछ गलती हुई हो तो उसके लिए माफी चाहूँगा. कृपया अधिवक्ताओं से आदेश को समझकर इसकी व्याख्या डालने की कृपा करें. धन्यवाद. 
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आदेश के १७ वें बिंदु का पहला आधा भाग १५ वें संशोधन के आधार ०७.१२.१२ के विज्ञापन को सुरक्षित कर रहा है लेकिन इसमें उन परिवर्तनों/विकास को शामिल करने को भी कह रहा है जो कुछ इन अपीलों के लंबित होने के दौरान (कोर्ट द्वारा अंतिम आदेश) किये जा चुके हैं...... १७ वें बिंदु का शेष आधा भाग ०७.१२.१२ के विज्ञापन के अनुसार भर्ती करने के बजाय इसे पुनर्गठित करके और १९ वें बिंदु के अनुसार केवल ७२८२५-६६५५=६१७० पदों पर किये जाने का आदेश दे रहा है. 
इस दशा में एक सशक्त रिव्यू याचिका के द्वारा ०७.१२.१२ के विज्ञापन के अनुसार ७२८२५ पदों पर सीधे आदेश की मांग के बिना नए विज्ञापन को बहाल नहीं किया जा सकेगा. 
सरकार से नए विज्ञापन पर भर्ती की मांग के ज्ञापन और आन्दोलन निरंतर किये जाने चाहिए लेकिन रिव्यू इस समय सबसे पहले जरूरी है, क्योंकि सरकार से नए विज्ञापन पर भर्ती की मांग अभीं से लेकर नए विज्ञापन की बहाली तक निरंतर की जा सकती है लेकिन यदि यह आदेश नए विज्ञापन पर भर्ती की मांग में बाधक बना तो आगे केवल रिव्यू ही सहारा होगा. और रिव्यू याचिका डालने के लिए केवल २६ दिन ही शेष बचे हैं. 
अभीं शिक्षामित्रों का उग्र आन्दोलन चल रहा है ऐसे में केवल कुछ दिन ज्ञापन देना और शिक्षामित्रों का उग्र आन्दोलन शांत होते ही नए विज्ञापन के लिए आन्दोलन करना सर्वोत्तम रहेगा. चयनित जो केवल आन्दोलन को कह रहे और रिव्यू से रोक रहे वे यदि आपके हितैषी होते तो ८३९ के चयन के बाद भी नए विज्ञापन की बहाली का प्रयास अवश्य करते. आज उनकी सहानुभूति केवल आपको रिव्यू में जाने से रोकने के लिए है जिससे उनपर कोइ खतरा ना आये, भले ही आप की जान चली जाए. विश्वासघात की रोटी खाकर भी जिसकी इन्सानियत अभीं भी कुछ ज़िंदा हो उनसे प्रार्थना है की अब तो अचयानितों को गुमराह ना करें और उन्हें अपने हाल पर अपनी लड़ाई आगे लड़ने दें. धन्यवाद

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7.12.12 के विज्ञापन से पूरे 72825 पद पर भर्ती के जो भी प्रयास प्रदेशभर में ज्ञापन के माध्यम से चल रहे और शांतिपूर्ण धरने आंदोलन की जो भी रणनीति बन रही है वह जारी रहने चाहिए। लेकिन साथ साथ रिव्यू के माध्यम से 7.12.12 के विज्ञापन पर स्पष्ट आदेश पाने के प्रयास की भी अनिवार्य जरूरत है। यदि रिव्यू याचिका खारिज होती है तो आदेश में कोई बदलाव नहीं होगा। और इस आदेश पर अगर हम सरकार से नए विज्ञापन पर भर्ती करा सकते है तो यदि रिव्यू खारिज हुआ तो भी हम इस आदेश पर सरकार से भर्ती करा लेंगे। 
समस्या यह है कि यदि इस आदेश पर सरकार ने नए विज्ञापन पर भर्ती नहीं की या नहीं कर सकी तो रिव्यू का अंतिम ऑप्शन भी खत्म हो जाएगा क्योंकि रिव्यू दाखिल करने के लिए अब अधिकतम 26 दिन शेष हैं। इन कुछ दिनों में आप अधिकतम सरकार से आश्वासन पा सकते हैं, भर्ती आरम्भ नहीं करा सकते।इसलिए नए विज्ञापन के हित में रिव्यू याचिका जरूरी है। 
रिव्यू के परिणाम के बाद सरकार भर्ती नहीं करेगी यह झूंठ उन्हीं चयनित साथियों द्वारा फैलाया जाना शुरू किया गया जिन्होंने अचायनितो को धोखे के सिवा कुछ नहीं दिया, और अनेक अचयनित साथी आज भी उन्हीं की बातों पर भरोसा कर रहे हैं। 
यदि रिव्यू सफल हुआ तो नए विज्ञापन पर भर्ती को कोई भी रोक नहीं सकेगा। 
पुनः उल्लेख करता हूँ कि यदि रिव्यू याचिका खारिज होती है तो आदेश में कोई बदलाव नहीं होगा। और इस आदेश पर अगर हम सरकार से नए विज्ञापन पर भर्ती करा सकते है तो यदि रिव्यू खारिज हुआ तो भी हम इस आदेश पर सरकार से भर्ती करा लेंगे। 
अचयनित साथी अपने खुद के विवेक से काम लें और जो भी प्रयास उन्हें खुद सही लगे वो करें। धन्यवाद।

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29/07/2017

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कार्य करना सरकार का काम ,कार्य की मांग करना संगठनों का काम,कानून के दायरे में रहकर उचित मांगे रखने का काम आम शिक्षा मित्र का है,,,,,,
सभी लोग सरकार से ऑर्डिनेंस लाकर समायोजन बचाने को लेकर नया कानून बनाने की मांग कर रहे हैं,यहां एक बात विचारणीय है अद्द्यादेश लाया जा सकता है सरकार अद्द्यादेश लाती भी है साथ ही कूपर केस (1970) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि अध्यादेश की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। हालांकि 38वें संविधान संशोधन अधिनियम 1975 में कहा गया कि राश्ट्रपति की संतुष्टि अंतिम व मान्य होगी और न्यायिक समीक्षा से परे होगी। परंतु 44वें संविधान संशोधन द्वारा इस उपबंध को खत्म कर दिया गया और अब राष्ट्रपति की संतुष्टि को असद्भाव के आधार पर न्यायिक चुनौती दी जा सकती है।यहां यह मामला संविधान के मौलिक अधिकारों से भी जुड़ा है अर्थार्त अनुच्छेद 21A के तहत बच्चों के गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के मौलिक अधिकार का हनन करेगी या यूं कहें कि अधिकार समाप्त करेगी तथा साथ ही साथ अनुच्छेद 14 व 16 के तहत उन लोगों के मौलिक अधिकारों का भी हनन होगा जो निर्धारित योग्यता रखते हैं व नौकरी पाने के इंतजार में हैं। और ऐसे व्यक्तियो द्वारा अद्द्यादेश को न्यायलय में चुनौती दी जा सकती है।25 जुलाई के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने लिखा है *पौने दो लाख शिक्षा मित्रों के भविष्य का ध्यान, उनके कानूनी हक से ऊपर जाकर, कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत 6 से 14 बर्ष के बच्चों के योग्य शिक्षकों से मुफ्त व गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा लेने के मौलिक अधिकार को दरकिनार कर नही किया जा सकता है,
संसद भारतीय संविधान के मूलभूत ढांचे से छेड़छाड़ करने की शक्ति नही रखती है।प्रत्येक जारी किया हुआ अध्यादेश संसद के दोनो सदनो द्वारा उनके सत्र शुरु होने के 6 हफ्ते के भीतर स्वीकृत करवाना होगा इस प्रकार कोई अध्यादेश संसद की स्वीकृति के बिना 6 मास + 6 सप्ताह से अधिक नही चल सकता है
लोकसभा एक अध्यादेश को अस्वीकृत करने वाला प्रस्ताव 6 सप्ताह की अवधि समाप्त होने से पूर्व पास कर सकती है
अगर अद्द्यादेश न्यायलय द्वारा रद्द होता है तो हम सबके लिए अंतिम चुनौतियो से लड़ना भी अंतिम हो जाएगा।
सरकार के पास जॉब बचाने के कई विकल्प हैं हालांकि सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ का उमा देवी केस शिक्षा मित्रों पर लागू कर चुकी है अर्थार्त नियमतिकरण का कोई विकल्प नही हैं। कानून के दायरे में रहकर ओर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखकर अपनी मांगे रखनी होंगी, जैसे प्रीवियस पद पर भेजते हुए रिजवी कमेटी की शिफारिशें लागू करके समान वेतन देने, उर्दू टेट की तरह टेट कराने, उसके बाद 2 फ्रेश रिक्रूटमेंट में अधिकतम वेटज देने,किसी अन्य प्री प्राइमरी पद सृजित करके सीधी भर्ती में अधिकतम वेटज देने के कई ऑप्शन सरकार के पास हैं जिससे सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी आड़े नही आएगा,ओर उमा देवी जजमेंट भी इफेक्टेड नही करेगा।(मेरे खुद के विकल्प सर्वोच्च न्यायालय का जजमेंट ध्यान में रखते हुए)
हम लोग सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के विरोध में प्रदर्शन नही कर सकते लेकिन अपनी सभी सटीक मांगे सरकार के समक्ष रखने के लिए अनिश्चित धरना प्रदर्शन लखनऊ में तब तक करना होगा जब तक सरकार कोई ठोस कदम नही उठाती

UPTET SHIKSHAMITRA स्कूल जाने के आदेश के बाद भी आंदोलन पर अड़े


UPTET SHIKSHAMITRA UPTET SHIKSHAMITRA शिक्षामित्रों को मूल विद्यालयों में भेजने की तैयारी




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UP EDUCATION 5 साल तक नहीं बनेंगे नए प्राथमिक विद्यालय



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UP HIGHER EDUCATION काउंसलिंग शुरू, मौके पर मिला नियुक्ति पत्र



SSC की परीक्षा में बड़ी संख्या में बीएड ,एलएलबी के डिग्री धारक



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UPTET SHIKSHAMITRA प्रदर्शनकारी शिक्षामित्रों पर अब सख्ती करेगी सरकार



UP TEACHERS अब अच्छे प्राइमरी शिक्षकों को विदेश भेजेगी सरकार


UPPSC पांच विवादित प्रस्तावों से आयोग कटघरे में



UP LT GRADE एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती लोक सेवा आयोग से कराने से तैयारी



UP SHIKSHAMITRRA राजनीति करने वालों के बहकावे में न आएं शिक्षामित्र: मुख्यमंत्री



SSC CGL सीजीएल 2017 में 76908 अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त



UP EDUCATION शिक्षक भर्ती के लिए अब नया आयोग